Haldi se cancer ka ilaj in hindi

हल्दी हमारे रोजाना के खाने में प्रयोग की जाने वाली बड़ी मामूली सी सामग्री है, जो खाने का स्वाद और रंग दोनों को बढ़ा देती है । पर क्या आप जानते हैं कि हमारे खाने में प्रयोग होने वाली हल्दी से कैंसर को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है । कुल मिलाकर हल्दी हमारी रसोई में मौजूद एक मेडिकल स्टोर की तरह है. इसलिए भारतीय परिवारों में गुणकारी हल्दी का खूब इस्तेमाल किया जाता है। आज इस पोस्ट में हम आपको हिंदी में हल्दी से कैंसर का इलाज के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देंगे।

Haldi se cancer ka ilaj in hindi


● हल्दी के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य :-

हल्दी का साइंटिफिक नाम करक्यूमिन होता हैं। भारतीय परंपरा में हल्दी को शुभ माना जाता है और इसके इस्तेमाल से आपके स्वास्थ्य को शुभ-लाभ वाला फायदा मिलेगा।

हल्दी को पौराणिक ग्रंथों में संजीविनी माना गया है और अगर आप इसका इस्तेमाल करेंगे, तो आपके स्वस्थ रहने के सम्भावना बढ़ जाती है।

हल्दी की कैंसर से लड़ने की ताकत को अमेरिका ने भी पहचाना है और दो भारतीय संस्थाओं को संयुक्त रूप से अमेरिका में इससे जुड़ा एक पेटेंट मिला है. कैंसर, दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारियों में एक है और अब हल्दी का उपयोग करके कैंसर के खिलाफ लड़ाई को हम और मजबूती से लड़ सकते हैं।

हल्दी में प्राकृतिक रूप से एक रासायनिक तत्व Curcumin(कर-क्यूमिन) पाया जाता है. इस तत्व में कैंसर से मुकाबला करने की क्षमता है। अक्सर कैंसर प्रभावित मरीजों में सर्जरी के बाद भी दोबारा कैंसर की वापसी हो जाती है, क्योंकि शरीर में कैंसर की बची हुई कुछ कोशिकाएं भी फिर से इस बीमारी को बढ़ा सकती हैं। लेकिन अब सर्जरी के बाद शरीर के उन हिस्सों पर कर-क्यूमिन से बना एक Skin Patch लगाया जा सकता है। त्वचा पर लगाए जाने के बाद ये Patch शरीर के उन हिस्सों में मौजूद कैंसर की कोशिकाओं को जड़ से खत्म कर देगा लेकिन इससे स्वस्थ कोशिकाओं को कोई नुकसान नहीं होगा, शरीर पर इसका कोई साइड इफेक्‍ट भी नहीं होता है।

● कैंसर पर हल्दी का गुणकारी प्रभाव :- 

हल्दी कैंसर कोशिकाओं यानी कैंसर सेल्स की बढ़ोतरी को रोकती है. ऐसा हल्दी की ऐंटी-एं‌जियोजेनिक प्रॉपर्टी के चलते होता है। हल्दी कैंसर सेल्स को नए ब्लड वेसल्स बनाने से रोकती है। इतना ही नहीं कैंसर सेल्स के माइटोकॉन्ड्रिया पर हमला करके, उन सेल्स की रिप्रोडक्शन साइकिल को बाधित कर देती है, इससे नए कैंसर सेल्स नहीं बन पाते।

कर्क्यूमिन कैंसर के तीनों स्टेजेस (इनीशिएशन, प्रमोशन और प्रोग्रेशन जिन्हें क्रमश: स्टेज 1, 2 और 3 कहा जाता है) में प्रभावी होता है. कर्क्यूमिन टोपोआइसोमेरैसेस नामक एन्ज़ाइम, जो कैंसर की कोशिकाओं की वृद्धि के लिए ज़िम्मेदार होता है, को प्रभावशाली ढंग से कम करता है, जिसके चलते कैंसर सेल्स का ग्रोथ काफ़ी हद तक कम हो जाता है.

कैंसर सेल्स कुछ समय बाद कीमोथेरैपी और रेडियोथेरैपी के आदी हो जाते हैं, उनपर इन ट्रीटमेंट्स का उतना असर नहीं होता। जब इन थेरैपीज़ के साथ हल्दी का सेवन किया जाता है, तब कर्क्यूमिन कैंसर सेल्स को छेड़ते रहता है, जिससे वे कीमोथेरैपी के आदी नहीं हो पाते. उनपर कीमोथेरैपी का असर होता है और उन सेल्स के जल्द से जल्द ख़ात्मे में मदद मिलती है. वहीं रेडियोथेरैपी के दौरान भी हल्दी बहुत फ़ायदेमंद होती है। हल्दी का घटक कर्क्यूमिन रेडिएशन के साइड-इफ़ेक्ट्स को कम कर देता है.

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हमारे देश में तिरुवनंतपुरम के एक संस्थान और दिल्ली के इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (Indian Council for Medical Research) ने मिलकर इस Skin Patch को विकसित किया है। इन दोनों संस्थानों को संयुक्त रूप से अमेरिका ने पेटेंट दिया है. ये कैंसर पीड़ितों और उनके परिवार वालों को राहत देने वाली खबर है। लेकिन अब हल्दी की मदद से कैंसर पीड़ितों को इस बीमारी से राहत मिलेगी।

● हल्दी को सेवन करने की विधि

हल्दी को आप चाहे ‌तो गुनगुने पानी में डालकर इस्तेमाल कर सकते हैं या दूध के साथ। हमारे यहां सब्ज़ियों और दाल में तो इसका इस्तेमाल किया ही जाता है। आप रोज़ाना एक चौथाई चम्मच हल्दी का सेवन करके इस जानलेवा बीमारी से लंबे समय तक बचे रह सकते हैं।

ज्यादातर लोग जिसे हल्दी को अलग अलग नाम से जानते है  लेकिन हल्दी का काम सिर्फ एक है और वो है आपको बीमारियों से मुक्त रखना।

आज आपको ये जानना चाहिए कि आपको प्रतिदिन हल्दी कितनी मात्रा में लेनी चाहिए। हल्दी में मौजूद एक रासायनिक तत्व कर-क्यूमिन आपके शरीर को कैंसर से लड़ने की क्षमता देता है और ये आपको स्वस्थ रखने वाले गुणों से भी भरपूर है.एक स्वस्थ व्यक्ति को दिनभर में 5 सौ से 2 हजार मिलीग्राम कर-क्यूमिन की जरूरत होती है। लेकिन इसके लिए आपको अलग से हल्दी का सेवन करने की आवश्यकता नहीं है। सुबह-शाम अगर आप हल्दी से बना भारतीय खाना खाते हैं तो आपकी जरूरतें पूरी हो जाएगी। अगर आप भारतीय खाना नहीं खाते हैं, तो भी प्रतिदिन एक चम्मच हल्दी का इस्तेमाल आपके लिए काफी होगा।

● हल्दी पर हुए वैज्ञानिक शोध :-

ब्रिटेन में हुई एक रिसर्च में कर-क्यूमिन ने 24 घंटे में ही कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करना शुरू कर दिया था. यानी हल्दी में मिलने वाले इस प्राकृतिक रसायन से कैंसर के नए इलाज विकसित किए जा सकते हैं।

हल्दी का इस्तेमाल करने के लिए आपको ज्यादा पैसे भी खर्च करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि दुनिया भर में भारत में ही सबसे ज्यादा और सबसे बेहतर क्‍वालिटी की हल्दी का उत्पादन होता है और उसका करीब 80 प्रतिशत हिस्सा देश में ही इस्तेमाल किया जाता है।

दुनिया को हल्दी की ताकत का पता अब चला है लेकिन भारत में हज़ारों वर्षों से जड़ी-बूटियों की सहायता से रोगों का इलाज किया जा रहा है। इस कला को आप आयुर्वेद कहा जाता है। ये भारत की प्राचीनतम विद्याओं में से एक है, पिछले कुछ समय से धरती पर लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है, इसलिए एक बार फिर दुनिया, भारत के प्राचीन ज्ञान पर भरोसा कर रही है। अमेरिका समेत दुनिया के तमाम देशों में हल्दी और आयुर्वेद के गुणों को ढूंढ़कर उसे बढ़ावा दिया जा रहा है

कुल मिलाकर अब दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी बीमारी कैंसर का इलाज हल्दी की गुणकारी शक्ति से हो पाएगा। अब दुनिया के बड़े-बड़े देश भारत से आयुर्वेदिक शक्ति हासिल करके जानलेवा बीमारियों का इलाज ढूंढ़ रहे हैं। ऐसे में भारत को भी ज्यादा रिसर्च करके, आयुर्वेद को आगे बढ़ाना होगा। रोगमुक्त भारत के स्वप्न को पूरा करने में हल्दी एक चमत्कारी औषधि साबित हो सकती है। पोस्ट पसंद आये तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करे क्योंकि जागरूक होगा भारत तभी तो कह सकेगा bye bye bimari

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