बारिश का मौसम किसे पसंद नही होता।यह मौसम जितना खूबसूरत होता है वही अगर इस बारिश के मौसम में हम अपने सेहत का ख्याल नही रखे तो हमें कई बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है,तो आज के इस पोस्ट में हम बात करेंगे बारिश के मौसम में होने वाली 10 बीमारियों की।Disease in rainy season.

Disease in rainy season.



इस पोस्ट में हम 10 mansoon disease के साथ उनके लक्षण और उनसे बचाव के तरीके के बारे में आपको बताएंगे ताकि आप उचित माध्यम से इन बीमारियों से बच सके और अपने आसपास के वातावरण को भी सुरक्षित रख सकें।

10 common diseases in rainy season

  1. डेंगु :- बारिश में मौसम में सबसे सामान्य बीमारी है डेंगू।यह एडीज़ मच्छर के काटने से होती है।इसमे रोगी को प्रारंभिक चरण में सर दर्द और बुखार जैसा अनुभव होता हैं जिसमें रोगी के शरीर का तापमान 104 डिग्री तक पहुंच जाता है।कुछ दिनों के बाद शरीर मे चकत्ते बनने लगते है जो बाद में चेचक के दाग समान दिखते है।गंभीर स्थिति आने पर पीड़ित के मुँह और नाक से रक्तस्त्राव भी हो सकते है।
  2. चिकनगुनिया:- चिकनगुनिया भी एक मानसूनी बीमारी है जो की ठहरे हुए पानी मे पैदा होने वाले मच्छरों के काटने से होती है।ये मच्छर ओवरहेड टेंक,वाटरपाइप,गमले,पुराने खाली डब्बे जिनमे बारिश का पानी जमा हो जाता है,में पाए जाते है।इसमे रोगी को तेज बुखार होता है जो 2 से 4 दिनों में समाप्त हो जाता है लेकिन जोड़ो में होने वाला दर्द कई हफ़्तों या महीनों तक चलता है जो उम्र अनुसार अलग अलग समय तक रह सकता है।इनके अलावा सिर में दर्द,आंखों में दर्द आदि इसके अन्य लक्षण भी देखने को मिलते है।
  3. मलेरिया:-बारिश के मौसम में होने वाली बीमारियों में सबसे आम और प्रचलित बीमारी है मलेरिया।यह भी मच्छर के काटने से होती है जो कि मादा एनाफिलीज मच्छर होते है।इसे आम तौर पर गरीबो की बीमारी के रूप में देखा जाता है।इसके रोगी को बुखार,कंपकपी,शरीर मे दर्द,सर्दी, जुकाम जैसे लक्षण दिखने को मिलते है।गंभीर स्थिति आने पर रोगी को चक्कर भी आ सकते है और यह रोग मृत्यु का भी कारण बन सकता है।
  4. हैजा :- हैजा दूषित पानी और खाने से फैलने वाली एक संक्रामक मानसूनी बीमारी है।इसके मरीज को जल्द से जल्द उपचार की आवश्यकता होती हैं अन्यथा यह रोग मृत्यु की ओर अग्रसित हो सकता है।इस रोग के कारक जीवाणु का नाम विब्रियो कॉलेरा है।प्रारंभिक लक्षणों में रोगी को दस्त की शिकायत होती है जो रोगी को निर्बल बना कर उसके रक्तचाप को गिरा देती है।ऐसे रोगी को तत्काल उपचार की आवश्यकता होती है अन्यथा 12 से 18 घण्टो के अंदर रोगी की मृत्यु हो सकती है।
  5. टाइफाइड :- यह साल्मोनेला टायफी नाम के जीवाणु द्वारा होता है जो की किसी संक्रमित व्यक्ति के मल से दूषित पानी या भोज्य पदार्थ के द्वारा अन्य व्यक्ति में होता है।इसे मियादी बुखार के अन्य नाम से भी जाना जाता है।ऐसे स्थिति उन जगहों पर निर्मित होती है जहाँ हाथ धोने की कोई विशेष सुविधा नही होती।यह जीवाणु सिर्फ मानवों में ही रोग पैदा करता है।इसके रोगी में कब्ज,पेट मे दर्द, तापमान में वृद्धि, कमजोरी आदि लक्षण देखने को मिल सकते है।
  6. वायरल फीवर :- वैसे तो वायरल फीवर साल भर होने वाली बीमारी है लेकिन मानसून के सीजन में यह तेजी से बुखार के रूप में पैदा होता हैं।इसमे रोगी के शरीर का तापमान बढ़ जाता है,आमतौर पर शरीर मे दर्द रहता है।इसके अलावा आंखों में गर्माहट लगना,कमजोरी,चक्कर लगना आदि लक्षण रोगी में दिख सकते है।
  7. डायरिया :- यह रोग मुख्य रूप से दूषित भोजन और पानी के ग्रहण करने से ही होता है।इसमे पीड़ित को उल्टी दस्त की परेशानी होती है जिसके कारण उसके शरीर मे डिहाइड्रेशन की स्थिति निर्मित हो जाती है जो बाद में त्वचा के रंग परिवर्तन,मूत्र त्याग में कमी,और हार्ट रेट में तेजी से बढोत्तरी होती है।इसके रोकथाम के लिए स्वच्छता, पानी पीने की मात्रा में वृद्धि,हाथ को साफ रखने के साथ घर के बने हुए भोजन को ग्रहण करना,इसके अलावा ORS घोल पिलाकर भी रोगी को राहत पहुँचाया जा सकता है।जिससे शरीर मे पर्याप्त मात्रा में शुगर और सोडियम प्रवेश कर जाता है,जो शरीर को ऊर्जावान और रक्तचाप को नियंत्रित करने का काम करती है।
  8. सामान्य सर्दी जुकाम :- मौसम में परिवर्तन होने सबसे आम समस्या सर्दी जुकाम की होती है।बारिश में भीग जाने से शरीर आसानी से सर्दी की चपेट में आ जाता है जिसका प्रमुख कारण शरीर के ताप में अंतर हो जाना है।इसमे प्रमुख लक्षण नाक का बहना, बार बार छींक का आना,शरीर का तापमान बढ़ जाना,इसके अलावा आलस्य का अनुभव होना इसके लक्षण है।
  9. लेप्टोसिरोसिस :- यह बैक्टिरिया से होने वाली एक रोग है जो पशुओ से मनुष्यों में फैलता है।शरीर के किसी भी स्थान पर कट या छिल जाने से जब हमारे शरीर का वह भाग गंदे पानी के संपर्क में आ जाये तो यह बैक्टिरिया घाव के मार्ग से हो कर शरीर मे प्रवेश कर जाता है।इसके प्रमुख लक्षणों में खुजली,स्किन में रूखापन,जोड़ो में दर्द,मांसपेशियों में खिंचाव, पेट में दर्द आदि देखने को मिलते है।
  10. आंत का संक्रमण:- मानसूनी मौसम में हमारे शरीर का उपापचय दर में गिरावट आ जाती है जिस कारण पाचन क्रिया प्रभावित हो जाती है।यदि हम कोई ऐसा खाद्य पदार्थ ग्रहण कर लेते है जो पाचन में ज्यादा समय ले तो यह हमारे आंत में संक्रमण का कारण बन सकता है।जिसके कारण हमें पेट मे दर्द,कब्ज,गैस की समस्या,उल्टी,डायरिया आदि की शिकायत हो सकती है।इसका रोकथाम का आसान तरीका यही है कि ऐसे मौसम में हमे ज्यादा तैलीय भोजन, बाहर के भोजन,आदि ग्रहण करने से बचना चाहिए।
इस तरह से हमने बारिश के मौसम में होने वाली बीमारियों के बारे में और उनके लक्षणों के बारे में यहां हमारी जानकारी आपके साथ शेयर की।disease in rainy season के इस पोस्ट पर आपकी कोई query हो तो आप हमें नीचे कमेंट कर सकते है।किसी भी तरह की सलाह के लिए आप अपने चिकित्सक से सम्पर्क करें।ध्यान रखें सावधानी ही सुरक्षा है।

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